दर्द ए ट्रंप

अच्छे तमाम लोग थे,   अच्छा था ये जहां

हम हो गए ख़राब क्यों, मत पूछिए जनाब

मैं यूं ही शाम के वक्त व्हाइट हाउस से गुज़र रहा था। हंगामे के दो दिन बाद ग़ुलाम अली की ग़ज़ल की आवाज़ सुन कर पहले तो यही लगा कि संसद में हमला करने वालों की भीड़ में तिरंगा लेकर आया था कहीं वही तो नहीं सुन रहा है। यहां कहीं झाड़ी में छिपा हुआ। मैं आवाज़ का पीछा करने लगा। विश्व बैंक की इमारत के नीचे से गुज़रते हुए अब मैं व्हाइट हाउस की तरफ़ चलने लगा हूं। आवाज़ साफ़ सुनाई देने लगी है। गेट पर पूछा कि कौन सुन रहा है। जवाब मिलता है भीतर ही चले जाइये। साहब सुन रहे हैं। साहब ! जी हमारे साहब।

बरामदे में कुर्सी पर ट्रंप बैठे हैं। मेज़ पर सोनी का पुराना टू इन वन टेपरिकार्डर बज रहा है। मेज़ पर बची हुई जगह में एक प्लेट में बादाम है और एक में काजू। ग्लास है लेकिन ख़ाली। शायद ट्रंप ने ख़ाली कर दी है। मेरे कदम ट्रंप की कुर्सी की तरफ बढ़ते जा रहे हैं।

एक आवाज़ मेरा स्वागत करती है। आओ। काश तुम मेरे अच्छे दिनों में आए होते। मैं चुप हो जाता हूं। ट्रंप साहब कभी स्टॉप तो कभी प्ले बटन दबाते रहे। ग़ज़ल रुकती रही। चलती रही।

ट्रंप साहब बार बार कुछ कहने के लिए इसरार करते हैं। मैं हर बार चुप रह जाता हूं। इस बार टेप रिकार्डर स्टाप कर देते हैं। मुझे लगा कि कहीं भीड़ को बुला तो नहीं रहे हैं। मैंने कहने के लिए कह दिया कि टेप रिकार्डर से क्यों सुन रहे हैं, आपके फोन में म्यूज़िक ओटीटी के एप तो होंगे ही। बस ट्रंप को गुस्सा आ गया।

नाम मत लो फोन का। इस फोन में कुछ नहीं है। कल से कोई मैसेज नहीं आया है। मैं ट्विट नहीं कर सकता। फेसबुक और इंस्टा पर पोस्ट नहीं कर सकता। मैं तड़प रहा हूं। यहां तो गुटका भी नहीं मिलता। टाइम कैसे काटूंगा। बिना पोस्ट किए कोई कैसे रह सकता है। ये भी कोई जीवन है। अमरीका का राष्ट्रपति हूं लेकिन किसी के पोस्ट को लाइक तक नहीं कर सकता। इस फोन का क्या करूं मैं? मेरे करोड़ों फोलोअर। कहां गए सब। मैं पोस्ट करना चाहता हूं। मैं ट्विट करना चाहता हूं। मैं फेसबुक लाइव करना चाहता हूं। मेरा पेज सस्पेंड कर दिया है। लग रहा है कि मैं जेल में हूं। मैं जीना चाहता हूं। मैं बोलना चाहता हूं। मैं झूठ बोलना चाहता हूं।

सुनो, तुम्हारा अकाउंट तो है न। ज़रा दिखा ही दो कि लोग क्या लिख रहे हैं। मुझे मिस कर रहे हैं कि नहीं। यार राष्ट्रपति नहीं हूं। चलेगा। बग़ैर ट्टिटर और फेसबुक के मैं मैं चल नहीं पाऊंगा। चला जाऊंगा। लोगों के सौ सौ फेक अकाउंट हैं और मेरा एक भी नहीं। तुम कहते क्यों नहीं कुछ। तभी फोन की घंटी बजने लगती है। इंडिया से रामदास अठावले का फोन है। ट्रंप काफी देर के लिए चुप हो जाते हैं। मैंने बस इतना ही पूछा। क्या बात हुई? ट्रंप ने टेप रिकार्डर का प्ले बटन दबा दिया...गु़लाम अली गा रहे हैं...

अच्छे तमाम लोग थे,   अच्छा था ये जहां

हम हो गए ख़राब क्यों, मत पूछिए जनाब

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